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आज फिर भारत वही पर आ गया जहाँ वो ७० साल पहले था। सुप्रीम कोर्ट ने फिर से मध्यस्तथा का आदेश दिया है राम मंदिर विवाद पर. अगर यही करना था तो इतना लम्बा इंतज़ार क्योँ करवाया। हिन्दू की भावनाओ का तमाशा इस देश हमेशा बनता आया है. आज हिन्दू इतना बेबस महसूस करता है की दुनिया में जहा जहाँ सबसे ज्यादा हिन्दू रहते हैहैं वह वो उनके भगवन का मंदिर नहीं बना सकते वो भी खासतौर से उस जगह जहाँ वो पैदा हुए थे
सुप्रीम कोर्ट पर आज तक लोगो का विश्वास था। उम्मीद थी की वो न्याय करेंगे। लेकिन मेरा मेरा भरोसा आज टूट गया। हिन्दू महासभा को ये केस वापस ले लेना चाहिए और इसका फैसला जनता के हाथ में दे देना चाहिए और आज के बाद सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला इस मुद्दे पर मान्य नहीं होगा।
आज मेरी आँखे नम हैं , मुझे आज भारतीय होने पर गर्व नहीं है
कल तक मैं आयुर्वेद , गणित , ज्योतिष ,खगोलविज्ञान , और हिन्दू परंपरा का एक तरह से हर जगह बखान करता था.
आज मेरे चेहरे पे थप्पड़ मार दिया गया. राजनीति ने बरबाद कर दिया है इस देश की संस्कृति को।
ओर हम , आज के युवा मजबूर हैं , कुछ नहीं कर सकते , क्योँकि हमारे पास टाइम नहीं है, हमें प्राइवेट नौकरी वालों ने खरीद लिया है. हम उनके लिए जीते हैं, हमारी खुद की कोई लाइफ नहीं है. हफ्ते में एक बार पार्टी करके हम अपनी ज़िन्दगी जीते हैं, उसमे खुशिया ढूंढते हैं.
आज के लिया बस इतना ही.